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भारत और चीन के बीच तनातनी की वजह क्या है

Written By Xpose News on Saturday, Jul 08, 2017 | 08:36 AM

 
भारत और चीन के बीच तनातनी की वजह क्या है सीमा विवाद के कारण बीते चार सप्ताह से भारत और चीन के बीच तनाव की स्थिति है. दोनों देशों के बीच 3,500 किमोलीटर (2,174 मील) लंबी सीमा है. सीमा विवाद के कारण दोनों देश 1962 में युद्ध के मैदान में भी आमने-सामने खड़े हो चुके हैं, लेकिन अभी भी सीमा पर मौजूद कुछ इलाकों को लेकर विवाद है जो कभी-कभी तनाव की वजह बनता है. बीते महीने शुरू हुए तनाव के बीच भारत और चीन ने सीमा पर अपनी फ़ौज की तैनाती बढ़ा दी और एक-दूसरे से उनकी सेना को वापस बुलाने के लिए कहा. कहां से तनाव की हुई शुरुआत? मामला तब शुरु हुआ जब भारत ने पठारी क्षेत्र डोकलाम में चीन के सड़क बनाने की कोशिश का विरोध किया. भारत में डोकलाम के नाम से जाने जाने वाले इस इलाके को चीन में डोंगलोंग नाम से जाना जाता है. ये इलाका वहां है जहां चीन और भारत के उत्तर-पूर्व में मौजूद सिक्किम और भूटान की सीमाएं मिलती हैं. भूटान और चीन दोनों इस इलाके पर अपना दावा करते हैं और भारत भूटान के दावे का समर्थन करता है. भारत को चिंता है कि इस सड़क का काम पूरा हो गया तो देश के उत्तर पूर्वी राज्यों को देश से जोड़ने वाली 20 किलोमीटर चौड़ी कड़ी यानी मुर्गी की गरदन जैसे इस इलाके पर चीन की पहुंच बढ़ जाएगी. ये वही इलाका है जो भारत को सेवन सिस्टर्स नाम से जानी जाने वाली उत्तर पूर्वी राज्यों से जोड़ता है और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है. भारतीय सेना के अधिकारियों ने क्षेत्रीय मामलों के जानकार सुबीर भौमिक को बताया कि उन्होंने चीन की इस कोशिश का विरोध किया है और यहां पर सड़क बनाने के काम को रोक दिया है, जिस कारण चीनी सेना ने आगे बढ़ कर नज़दीक के लालटेन आउटपोस्ट पर सेना के दो बंकरों को तबाह कर दिया है. नाम न बताए जाने की शर्त पर एक ब्रिगेडियर ने बताया, "हमने गोलियां नहीं चलाईं. हमारे जवानों से मानव श्रृंखला बनाई और सड़क का काम रोका ताकि चीनी देश के भीतर ना आ सकें." चीनी अधिकारियों का दावा है कि सड़क निर्माण का विरोध करके भारतीय सीमा सुरक्षाबलों ने सीमा की दूसरी तरफ़ चीन में "सामान्य गतिविधि" में अड़चन डाली है और उन्होंने भारत से अपनी सेना पीछे हटाने के लिए कहा. भारत और चीन दोनों ने ही अपनी सेनाएं सीमा की तरफ़ भेज दीं और मीडिया में आ रही ख़बरों के अनुसार दोनों देश फ़िलहाल पीछे हटने को तैयार नहीं. मामला पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चीन ने सिक्किम के नाथुला दर्रे से होकर तिब्बत स्थित मानसरोवर तक जाने वाले 57 भारतीय तीर्थयात्रियों को कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए रास्ता देने से इंकार कर दिया. हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले कैलाश मानसरोवर को पवित्र मानते हैं. इस यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों को रास्ता देने को लेकर दोनों देशों में औपचारिक समझौता हुआ था. इस बीच भूटान ने भी चीन से सड़क बनाने के लिए मना किया है और कहा है कि यह दोनों देशों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन है